तरबगंज विधानसà¤à¤¾ सीट - Gonda
तरबगंज |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री प्रेम नरायन पाण्डेय |
| जिला | Gonda |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | कैसरगंज |
तरबगंज विधानसभा सीट
तरबगंज विधानसभा सीट (संख्या 299) उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित है और कैसरगंज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट 2012 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई और मुख्यतः टाराबगंज तहसील, नगर व आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है। क्षेत्र में कृषि, पशुपालन और छोटे व्यवसाय आजीविका के मुख्य स्रोत हैं।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: गोंडा
विधानसभा क्रमांक: 299
लोकसभा क्षेत्र: कैसरगंज
कुल अनुमानित आबादी: 3.5–4 लाख
साक्षरता दर: 59.4%
लिंग अनुपात: 867/1000
आरक्षण: सामान्य
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 80-85%
मुस्लिम: 12-15%
अन्य समुदाय: 1% से कम
अनुसूचित जाति: 20-25%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,08,604
विजेता: प्रेम नारायण पांडेय (भाजपा)
वोट शेयर: 60.1%
उपविजेता: रामभजन चौबे (सपा)
मतदान प्रतिशत: 57.5%
तरबगंज विधानसभा सीट गोंडा जिले में 2008 के परिसीमन के बाद बनाई गई थी और अब तक यहां तीन विधानसभा चुनाव हो चुके हैं। 2012 में हुए पहले चुनाव में सपा के अवधेश कुमार सिंह उर्फ मंजू सिंह ने जीत हासिल की थी। इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा के प्रेम नारायण पांडे ने लगातार दो बार जीत दर्ज की और क्षेत्र में पार्टी की पकड़ मजबूत की। यहां क्षत्रिय और ब्राह्मण समुदाय का प्रभाव काफी ज्यादा है, जिसका फायदा भाजपा को मिलता रहा है। वहीं, समाजवादी पार्टी ने लगातार चुनौती दी, लेकिन जीत का अंतर बढ़ता गया। बसपा और कांग्रेस की भूमिका सीमित रही और उनका वोट प्रतिशत लगातार घटता गया। 2022 के चुनाव में प्रेम नारायण पांडे ने सपा के राम भजन चौबे को 53,690 वोटों से हराया। उन्हें कुल करीब 59% वोट मिले, जबकि सपा को लगभग 34% वोट हासिल हुए। बुनियादी विकास, सड़क, बिजली, जल निकासी और किसानों की समस्याएं चुनावी चर्चा में प्रमुख रही हैं।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
प्रेम नारायण पांडेय भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं और उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले की तरबगंज विधानसभा सीट से लगातार दूसरी बार चुने गए हैं। उनका जन्म 2 अक्टूबर 1957 को रानीपुर गांव में एक किसान परिवार में हुआ था। उन्होंने इंटरमीडिएट तक की पढ़ाई महाराजा देवी बख्श सिंह इंटर कॉलेज, बेलसर गोंडा से की। वे न केवल एक किसान हैं, बल्कि एक सक्रिय सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाने जाते हैं, जो स्वच्छता, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण विकास जैसे मुद्दों पर लगातार काम करते रहे हैं। उनका राजनीतिक सफर 2017 में भाजपा के उम्मीदवार के रूप में शानदार जीत के साथ शुरू हुआ और 2022 में भी उन्होंने समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी को हराकर अपनी लोकप्रियता साबित की। उनके खिलाफ किसी तरह का आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। 2022 चुनाव आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
तरबगंज विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में तरबगंज विधानसभा क्षेत्र में विकास के कई अहम मुद्दे सामने आए हैं। सड़क, जल निकासी, बिजली और साफ पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं की कमी लगातार चर्चा में रही। तहसील परिसर में आरओ और वाटर कूलर जैसे जरूरी उपकरण खराब रहने से आम लोगों और कर्मचारियों को परेशानी झेलनी पड़ी। गांवों में टूटी सड़कों, जलभराव और साफ-सफाई की दिक्कतें बनी रहीं। शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की हालत भी संतोषजनक नहीं रही कई स्कूलों और अस्पतालों में जरूरी सुविधाएं और स्टाफ की कमी लोगों को खलती रही, हालांकि ओम साईं इंटरनेशनल स्कूल को सीबीएसई से मान्यता मिलने से थोड़ी राहत जरूर मिली। कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंता बनी रही, खासकर महिलाओं के खिलाफ हिंसा और दहेज से जुड़ी घटनाओं के कारण। खेती पर निर्भर इस इलाके में किसानों को सिंचाई, फसल के सही दाम और सरकारी मदद की कमी महसूस हुई। मौसम में बदलाव और सूखे की वजह से पैदावार पर असर पड़ा। जातीय रूप से यहां क्षत्रिय और ब्राह्मण समुदाय का प्रभाव साफ दिखता है और इन्हीं समीकरणों के आधार पर चुनावी रणनीति बनती रही है। भाजपा और सपा के बीच मुकाबला लगातार बना रहा, जबकि बसपा और कांग्रेस की भूमिका सीमित रही।