तिलोई विधानसभा सीट - Amethi

तिलोई

वर्तमान विधायक
श्री मयंकेश्‍वर शरण सिंह
जिला
Amethi
राज्य
उत्तर प्रदेश
पार्टी
भारतीय जनता पार्टी
कुल मतदाता
लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र
अमेठी
तिलोई विधानसभा सीट
तिलोई विधानसभा उत्तर प्रदेश के अमेठी जिले की एक प्रमुख सीट है। यह विधानसभा क्रमांक 178 है और अमेठी लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है। तिलोई का क्षेत्र पूर्णतः ग्रामीण है और ऐतिहासिक, जातीय तथा राजनीतिक प्रभाव के लिए जाना जाता है। यहां राजनीतिक सक्रियता और विविधता देखने को मिलती है, जिसमें कुर्मी, मुस्लिम, ब्राह्मण जैसी प्रमुख जातियों की भागीदारी है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: अमेठी
विधानसभा क्रमांक: 178
लोकसभा क्षेत्र: अमेठी
आरक्षण: सामान्य (अनारक्षित)
अनुमानित आबादी: लगभग 3,00,000
साक्षरता दर: लगभग 66-68%
लिंग अनुपात: 960/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन  (जिला)
हिंदू: लगभग 83%
मुस्लिम: लगभग 16%
अन्य समुदाय: लगभग 1%
अनुसूचित जाति: अनुमानित 22%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,03,130
विजेता: मयंकेश्वर शरण सिंह (भाजपा)
वोट शेयर: 49.0%
उपविजेता: मोहम्मद नईम (सपा)
मतदान प्रतिशत: 58.4%
तिलोई विधानसभा, जो कभी रायबरेली जिले का हिस्सा रही और अब अमेठी जिले में आती है, लंबे समय से राजनीतिक रूप से अहम मानी जाती है। ऐतिहासिक रूप से यहाँ तिलोई रियासत के राजा परिवार का प्रभाव रहा है। 1967 में कांग्रेस के वसीम नकवी विधायक बने, इसके बाद 1969 से राजा मोहन सिंह ने जनसंघ और कांग्रेस दोनों के टिकट पर अपना दबदबा कायम रखा। 1980 से 1991 तक कांग्रेस के हाजी वसीम लगातार जीतते रहे, लेकिन 1993 में मयंकेश्वर शरण सिंह ने भाजपा के टिकट पर कांग्रेस का किला ढहा दिया। इसके बाद उन्होंने 2002, 2007 और 2017 में अलग-अलग पार्टियों (भाजपा और सपा) से जीत हासिल की, जबकि 1996 और 2012 में मोहम्मद मुस्लिम क्रमशः सपा और कांग्रेस से विजयी रहे। तिलोई की राजनीति में राजपूत, ब्राह्मण, मुस्लिम, ओबीसी और दलित समुदायों का वोट निर्णायक भूमिका निभाता रहा है। हालिया रुझानों की बात करें तो 2017 में मयंकेश्वर शरण सिंह ने भाजपा से बड़ी जीत दर्ज की और 2022 में भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशी के तौर पर अपना दबदबा बनाए रखा। इस चुनाव में उन्होंने सपा उम्मीदवार मोहम्मद नईम गुर्जर को लगभग 27,829 वोटों से हराया। करीब 3.5 लाख मतदाताओं वाले इस क्षेत्र में 53% मतदान हुआ और मयंकेश्वर शरण सिंह को करीब 49.1% वोट मिले, जिससे साफ हुआ कि तिलोई में फिलहाल भाजपा की पकड़ मजबूत है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
मयंकेश्वर शरण सिंह, अमेठी जिले की तिलोई विधानसभा सीट से भाजपा विधायक, का जन्म लखनऊ में हुआ था। छत्रिय समुदाय से आने वाले सिंह ने स्नातक तक की पढ़ाई की है और पेशे से कृषि कार्य से जुड़े हैं। वे अपने पिता, स्वर्गीय राजा मोहन सिंह की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। 2007 से लगातार राजनीति में सक्रिय मयंकेश्वर शरण सिंह ने 2017 और 2022 दोनों विधानसभा चुनावों में जीत दर्ज कर अपनी पकड़ और मजबूत की। चुनावी हलफनामे के मुताबिक, उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामले दर्ज हैं, जिनमें ज्यादातर आरोप चुनावी राजनीति से जुड़े मामूली किस्म के हैं। इसके बावजूद वे स्थानीय राजनीति में एक प्रभावशाली नेता के रूप में पहचाने जाते हैं।
तिलोई विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पाँच वर्षों में तिलोई विधानसभा क्षेत्र की राजनीति और जनचर्चा मुख्यतः स्थानीय समस्याओं और विकास से जुड़ी रही। स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी यहाँ का बड़ा मुद्दा बनी रही, हालांकि 2020 के बाद विधायक मयंकेश्वर शरण सिंह की पहल पर मेडिकल कॉलेज की घोषणा से लोगों में उम्मीद जगी। खराब सड़कों और कमजोर यातायात व्यवस्था ने ग्रामीणों, किसानों और कारोबारियों को लगातार परेशान किया, वहीं कृषि से जुड़े संकट जैसे सिंचाई, उचित समर्थन मूल्य, फसल बीमा और ऋण राहत किसानों की मुख्य चिंता रहे। शिक्षा की गुणवत्ता और उच्च शिक्षा के साधनों की कमी के कारण युवाओं में निराशा दिखी और रोजगार के अवसरों का अभाव भी चर्चा का केंद्र बना। इसके साथ ही पानी की किल्लत, स्वच्छता की स्थिति और जल संरक्षण जैसे मुद्दे बार-बार सामने आते रहे। सामाजिक-सांस्कृतिक समरसता बनाए रखने और जातीय समीकरण को संतुलित करने की चुनौती भी बनी रही। वहीं, विकास कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही की कमी पर जनता ने सवाल उठाए। कुल मिलाकर, इन मुद्दों ने तिलोई के सामाजिक-राजनीतिक माहौल को गहराई से प्रभावित किया है और आगामी चुनाव में इन्हीं सवालों का असर वोटिंग पैटर्न पर पड़ सकता है।

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