तिर्वा विधानसà¤à¤¾ सीट - Kannauj
तिर्वा |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री कैलाश राजपूत |
| जिला | Kannauj |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | 2,37,236 |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | कन्नौज |
तिर्वा विधानसभा सीट
तिर्वा विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में स्थित है और कन्नौज लोकसभा क्षेत्र का हिस्सा है। यह सीट शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों को कवर करती है और 2008 के परिसीमन के बाद अस्तित्व में आई (विधानसभा क्रमांक 197)। तिरवा जिले की प्रमुख राजनीतिक सीटों में गिनी जाती है।
जनसंख्या (जनगणना 2011)
जिला: कन्नौज
विधानसभा क्रमांक: 197
लोकसभा क्षेत्र: कन्नौज
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: 2.5-3 लाख
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: 70-80%
मुस्लिम: 15-20%
अन्य समुदाय: 1-5% से कम
अनुसूचित जातियाँ: 15-20%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 2,37,236
विजेता: कैलाश सिंह राजपूत (भाजपा)
वोट शेयर: 44.7%
उपविजेता: अनिल कुमार पाल (सपा)
मतदान प्रतिशत: 62.5%
तिरवा विधानसभा सीट पर किसी एक पार्टी का लंबे समय से वर्चस्व नहीं रहा है। यहां के वोटर अक्सर अपनी पसंद बदलते रहे हैं। 1960 के दशक में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी से शुरुआत हुई, फिर कांग्रेस, सपा, बसपा और अब भाजपा तक यह सीट घूमती रही। 2012 में सपा के विजय बहादुर पाल ने जीत हासिल की थी, लेकिन 2017 और 2022 में भाजपा के कैलाश सिंह राजपूत लगातार दो बार विधायक बने। हालांकि 2022 के चुनाव में उनकी जीत का अंतर काफी कम रह गया। सिर्फ 4,608 वोटों से सपा के अनिल पाल को हराया। इससे सपा की पकड़ फिर से मजबूत होती दिखी। वहीं बसपा की स्थिति लगातार कमजोर हुई है; 2022 में उन्हें सिर्फ 9.69% वोट मिले। कुल मिलाकर, 2022 में भाजपा को 44.51% वोट, सपा को 42.57%, और बीएसपी को करीब 10% वोट मिले। यह साफ है कि तिरवा में मुकाबला अब भाजपा और सपा के बीच कड़ा होता जा रहा है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
कैलाश सिंह राजपूत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता हैं और तिरवा विधानसभा (कन्नौज, यूपी) से दो बार विधायक चुने जा चुके हैं। पहली बार 2017 में और फिर 2022 में। उम्र के लिहाज से वो करीब 63 साल (2022 के अनुसार) के हैं। पेशे से वकील हैं, साथ ही खेती-किसानी से भी जुड़े हैं। उनकी पढ़ाई प्रोफेशनल ग्रेजुएट लेवल की है। वो अपने क्षेत्र में सक्रिय रहने और भाजपा की पकड़ बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं। जहां तक उनके आपराधिक रिकॉर्ड की बात है, तो 2022 चुनावी हलफनामे के अनुसार, उनके खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
तिरवा विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
तिरवा विधानसभा (कन्नौज, यूपी) में पिछले कुछ सालों में लोगों ने रोज़मर्रा की कई जरूरी दिक्कतों का सामना किया है। सबसे बड़ी परेशानी सड़क और बुनियादी ढांचे को लेकर रही—गांवों में कच्ची सड़कें, जर्जर पुल और टूटी-फूटी गलियां अब भी आम हैं। सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर और दवाओं की कमी से लोग इलाज के लिए परेशान होते रहे, और एंबुलेंस की सुविधा भी अक्सर नदारद रही। सरकारी स्कूलों की हालत भी कुछ खास नहीं रही। कहीं शिक्षक कम हैं, तो कहीं स्कूल बिल्डिंग जर्जर है और शौचालय या पीने के पानी की भी दिक्कत रही। किसान भी बिजली कटौती, सिंचाई के साधनों की कमी और मंडियों में सही दाम न मिलने से लगातार नाराज़ रहे। युवाओं को अपने इलाके में रोज़गार के मौके नहीं मिल पाए, और जो स्वरोज़गार योजनाएं आईं, उनका ठीक से फायदा नहीं मिल पाया। गर्मियों में पानी की किल्लत और खराब हैंडपंप-ट्यूबवेल ने हालात और बिगाड़े। इसके अलावा, चोरी, लूटपाट और महिलाओं की सुरक्षा जैसे कानून-व्यवस्था के मुद्दे भी लोगों की चिंता का कारण बने रहे। कुल मिलाकर, यहां की जनता अब भी बेहतर सड़क, इलाज, पढ़ाई, रोजगार और सुरक्षा की उम्मीद में है।