वाराणसी दक्षिण विधानसà¤à¤¾ सीट - Varanasi
वाराणसी दक्षिण |
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|---|---|
| वर्तमान विधायक | डॉo नीलकण्ठ तिवारी |
| जिला | Varanasi |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | भारतीय जनता पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | वाराणसी |
वाराणसी दक्षिण विधानसभा
वाराणसी दक्षिण विधानसभा, वाराणसी जिले की ऐतिहासिक और व्यावसायिक दृष्टि से बेहद अहम शहरी सीट है। यहां बनारसी व्यापार, संस्कृति और संत-परंपरा की गहरी छाप देखी जाती है। पुरातन घाट, मंदिर, संकरी गलियाँ और शहरी भीड़भाड़ इसकी पहचान हैं। यहां बनारसी साड़ी उद्योग और स्थानीय बाजार इस क्षेत्र को अलग चरित्र देते हैं। सीट पर सभी धर्म व जातियों का संतुलित मिश्रण है, लेकिन नगरीय व्यापारिक समाज का प्रभाव विशेष है।
जनसंख्या (जनगणना 2011):
जिला: वाराणसी
विधानसभा क्रमांक: 389
लोकसभा क्षेत्र: वाराणसी
आरक्षण: सामान्य
अनुमानित आबादी: लगभग 12 लाख
साक्षरता दर: 79.27%
लिंग अनुपात: करीब 887/1000
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
हिंदू: लगभग 70-75%
मुस्लिम: करीब 23-25%
अन्य समुदाय: 2-3% (जैन, सिख, ईसाई)
अनुसूचित जाति: करीब 10%
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
कुल मतदाता: 1,94,844
विजेता: डॉ. नीलकंठ तिवारी (भाजपा)
वोट शेयर: 51.1%
उपविजेता: कमेश्वर उर्फ किशन दीक्षित (सपा)
मतदान प्रतिशत: 60.5%
वाराणसी दक्षिण विधानसभा सीट उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले की एक ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व की सीट है, जिसे भाजपा का मजबूत गढ़ माना जाता है। इस सीट का राजनीतिक इतिहास काफी लंबा है, जहां सबसे पहले 1951 और 1957 में डॉ. संपूर्णानंद विधायक बने थे, जो उत्तर प्रदेश के प्रथम मुख्यमंत्री भी रहे। 1969 और 1974 में जनसंघ ने यहां जीत दर्ज की थी, लेकिन 1989 से 2012 तक श्यामदेव राय चौधरी लगातार सात बार विधायक बने और भाजपा की पकड़ को और मजबूत किया। 2017 में भाजपा ने श्यामदेव राय चौधरी की जगह युवा डॉ. नीलकंठ तिवारी को चुनाव मैदान में उतारा, जिन्होंने कांग्रेस के पूर्व सांसद राजेश मिश्र को हार दिलाई। डॉ. नीलकंठ तिवारी ने फिर 2022 में भी जीत दर्ज की। इस क्षेत्र में ब्राह्मण, वैश्य, मुस्लिम और अन्य पिछड़े वर्ग की आबादी चुनावी समीकरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। 2022 के चुनाव में कुल करीब 2,79,322 मतदाताओं में से लगभग 52-55% ने मतदान किया, जिसमें डॉ. नीलकंठ तिवारी ने करीब 50.88% वोट शेयर के साथ सपा के कमलेश्वर उर्फ किशन दीक्षित को लगभग 10,722 वोटों के अंतर से हराया। भाजपा का प्रभाव इस सीट पर लगातार मजबूत होता जा रहा है और इसे उत्तर प्रदेश की सबसे स्थिर भाजपा सीटों में से एक माना जाता है।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
डॉ. नीलकंठ तिवारी भारतीय जनता पार्टी के विधायक हैं और वाराणसी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। उनका जन्म 20 जुलाई 1971 को उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले में हुआ था। इन्होंने हैरिशचंद्र पोस्ट ग्रेजुएशन कॉलेज से बीएससी, एलएलबी की पढ़ाई की और बाद में इंटीग्रल ह्यूमनिज्म व सोशल इंजीनियरिंग में पीएचडी भी पूरी की। पेशे से वे अधिवक्ता रहे हैं और वाराणसी कोर्ट में काम कर चुके हैं। राजनीति में उनकी शुरुआत छात्र संघ महामंत्री के रूप में हुई थी। इसके बाद वे भाजपा के महानगर अध्यक्ष और युवा मोर्चा के उपाध्यक्ष भी रह चुके हैं। वर्तमान में वे उत्तर प्रदेश सरकार में राज्य मंत्री (पर्यटन विभाग) के पद पर कार्यरत हैं। डॉ. नीलकंठ तिवारी के खिलाफ कोई गंभीर आपराधिक मामला दर्ज नहीं है। 2022 के चुनावी हलफनामे के अनुसार, डॉ. नीलकंठ तिवारी के खिलाफ एक आपराधिक मामला दर्ज है।
वाराणसी दक्षिण विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
पिछले पांच वर्षों में वाराणसी दक्षिण विधानसभा क्षेत्र में स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचा और रोजगार जैसे कई अहम मुद्दों पर काम हुआ है। कबीरचौरा अस्पताल को मॉडल अस्पताल बनाने के प्रयास किए गए, जिसमें डायलिसिस, फिजियोथेरेपी और बच्चों के लिए पेडियाट्रिक सेंटर जैसी सुविधाएं जोड़ी गईं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को बेहतर भवनों में स्थानांतरित कर स्वास्थ्य सेवा को मजबूत किया गया। सरकारी स्कूलों का कायाकल्प करके शिक्षा प्रणाली को सुधारने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया। साथ ही, वाराणसी का विश्वनाथ मंदिर और गंगा घाट जैसे पवित्र धार्मिक स्थल क्षेत्र की पहचान हैं, इसलिए इनके संरक्षण और विकास को प्राथमिकता दी गई। सड़कों का चौड़ीकरण, ग्रेट सेपरेटर का निर्माण, और बाजारों के आधुनिकीकरण जैसे कार्य भी किए गए ताकि लोगों को बेहतर सुविधाएं मिल सकें। सामाजिक सुरक्षा और समुदायों के बीच शांति-समाज बनाए रखने के लिए भी विशेष प्रयास किए गए। इसके अलावा, किसानों की आय बढ़ाने के लिए सिंचाई और जल संरक्षण से जुड़े योजनाएं शुरू की गईं। कुल मिलाकर, वाराणसी दक्षिण ने अपने धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व के साथ-साथ विकास की दिशा में निरंतर कदम बढ़ाए हैं।