ज़ैदपुर विधानसà¤à¤¾ सीट - Barabanki
ज़ैदपुर |
|
|---|---|
| वर्तमान विधायक | श्री गौरव कुमार |
| जिला | Barabanki |
| राज्य | उत्तर प्रदेश |
| पार्टी | समाजवादी पार्टी |
| कुल मतदाता | |
| लोक सभा निर्वाचन क्षेत्र | बाराबंकी |
जैदपुर विधानसभा क्षेत्र (बाराबंकी):
जैदपुर उत्तर प्रदेश की विधानसभा सीट संख्या 269 है, जो बाराबंकी ज़िले में स्थित है। यह सीट जैदपुर कस्बे और इसके आस-पास के ग्रामीण इलाकों को कवर करती है। जैदपुर, बाराबंकी लोकसभा क्षेत्र के पाँच विधानसभा खंडों में से एक है। यह सीट अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित है। वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के गौरव कुमार (गौरव रावत) ने भाजपा प्रत्याशी को कड़े मुकाबले में हराकर जीत दर्ज की।
जनसंख्या
विधानसभा क्षेत्र संख्या: 269
जिला : बाराबंकी
लोकसभा क्षेत्र: बाराबंकी
कुल मतदाता (2017): 3,66,644
अनुमानित जनसंख्या (2025): लगभग 48,000
जनगणना 2011: 34,443
पुरुष: 17,747,
महिलाएं: 16,696
अनुसूचित जाति: लगभग 7.1%
धार्मिक और सामाजिक विभाजन
मुस्लिम: 81.89%
हिन्दू: 17.80%
ईसाई: 0.15%
अन्य: 0.2% से कम
राजनीतिक इतिहास और हालिया चुनावी रुझान
2022 चुनावी परिणाम
विजेता: गौरव रावत (सपा)
वोट शेयर: 40.86%
उपविजेता: अंबरीश रावत (भाजपा)
जैदपुर विधानसभा सीट का गठन 2011 के परिसीमन के बाद हुआ, जब इसे मसौली विधानसभा क्षेत्र से अलग कर एक नई सीट के रूप में स्थापित किया गया। यह अनुसूचित जाति (SC) के लिए आरक्षित सीट है। आज़ादी के बाद इस क्षेत्र में लंबे समय तक कांग्रेस का वर्चस्व रहा, लेकिन 2012 में पहले चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) के राम गोपाल ने जीत दर्ज की। 2017 में भाजपा के उपेंद्र सिंह ने सपा को हराकर बड़ी जीत हासिल की, लेकिन उनके सांसद बनने के बाद 2019 में हुए उपचुनाव में सपा के गौरव कुमार (गौरव रावत) ने भाजपा के अंबरीश रावत को 4,165 वोटों से हराकर सीट वापस जीत ली। 2022 में भी गौरव रावत ने अंबरीश रावत को 2,982 वोटों के बेहद करीबी अंतर से हराया। यह मुकाबला सपा, भाजपा और कांग्रेस के बीच त्रिकोणीय रहा, जिसमें कांग्रेस प्रत्याशी तनुज पुनिया (पी.एल. पुनिया के पुत्र) ने भी उल्लेखनीय प्रदर्शन किया। हालांकि, क्षेत्र में सपा विधायक की सक्रियता की कमी और विकास कार्यों के अभाव को लेकर जनता में असंतोष देखा गया, जबकि भाजपा सरकार की योजनाएं और कांग्रेस उम्मीदवार की सक्रियता चर्चा का विषय बनी रहीं। चुनाव में मुस्लिम, दलित और ओबीसी वोट निर्णायक रहे, जबकि आवारा पशुओं, बुनियादी सुविधाओं की कमी, बेरोजगारी और विकास की धीमी गति जैसे स्थानीय मुद्दे प्रमुख रहे।
विधायक परिचय और आपराधिक मामला
गौरव कुमार रावत, समाजवादी पार्टी के युवा और सक्रिय नेता हैं। अनुसूचित जाति (पासी) समुदाय से आने वाले गौरव रावत ने बीटेक की डिग्री प्राप्त की है और व्यवसायी के साथ-साथ एक जनप्रतिनिधि के रूप में कार्यरत हैं। उन्होंने 2009 में सपा से जुड़कर अपने राजनीतिक कॅरियर की शुरुआत की और लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ में भी सक्रिय भूमिका निभाई। 2019 में जैदपुर (SC) सीट के उपचुनाव में उन्होंने पहली बार विधायक के रूप में जीत दर्ज की और 2022 में लगातार दूसरी बार भाजपा के अंबरीश रावत को 2,421 वोटों से हराकर विधायक निर्वाचित हुए। उनकी प्राथमिकताएं शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे के विकास पर केंद्रित रही हैं, साथ ही वे युवाओं और समाज के वंचित वर्गों के लिए काम करने को प्रतिबद्ध हैं। 2022 के चुनावी शपथपत्र के अनुसार, उनके खिलाफ तीन आपराधिक मामला दर्ज है।
जैदपुर विधानसभा: पिछले 5 वर्षों के प्रमुख मुद्दे
जैदपुर विधानसभा क्षेत्र में बुनियादी ढांचे की बदहाली एक गंभीर समस्या बनी हुई है। जर्जर सड़कें, टूटी नालियां और बरसात के दौरान जलभराव की स्थिति आम हो गई है, जिससे खासकर ग्रामीण और कस्बाई इलाकों में सीवर और सफाई व्यवस्था पर लगातार सवाल उठते रहे हैं। रोजगार के अवसरों की भारी कमी है, खासकर लंबे समय से बंद पड़ी कतई मिल और बुढ़वल चीनी मिल के कारण, जिससे युवाओं में बेरोजगारी और पलायन की प्रवृत्ति बढ़ी है। शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं की स्थिति भी चिंताजनक है. सरकारी उच्च शिक्षण संस्थानों की संख्या सीमित है और ट्रॉमा सेंटर होने के बावजूद सरकारी अस्पताल केवल रेफरल केंद्र की तरह कार्य करता है, जिससे गंभीर मरीजों को बाहर जाना पड़ता है। हर साल क्षेत्र बाढ़ की विभीषिका से प्रभावित होता है, जिससे फसलें और जनजीवन बुरी तरह प्रभावित होते हैं। इसके साथ ही, जनप्रतिनिधियों की क्षेत्र में कम सक्रियता और धीमी विकास गति को लेकर जनता में असंतोष है। मुस्लिम, ओबीसी (कुर्मी, यादव) और दलित (पासी) मतदाता बुनियादी सुविधाओं, सुरक्षा और सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन की अपेक्षा रखते हैं। इसके अतिरिक्त, आवारा पशुओं से फसलों को होने वाला नुकसान भी एक प्रमुख चुनावी मुद्दा बनकर उभरा है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय बना हुआ है।